हमने
कहा सपनोसे के तू खिल जा ,
उसने
कहा हमसे ....... हो सके तो तू मुझे भूल जा
वो भी
डटा रहा हमें भूलने की जिद पर……
और हम
भी अढे रहे उसे जिन्दा रखने की जिद पर.
वो कहते हे हमसे के.. आपकी आखोसे आपकी उम्र गुजर
रही है,
सच तो ये है के. उनको जवां रखनेसेही इन आखोकी रोनक बढ रही है .
पता है
की ख्वाबोंपे इतना भरोसा अच्छी बात नहीं.......
लेकिन क्या करे उनके बिना भी...... इन धडकनोंकी कोई क़ीमत नहीं.
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